शब्दावली
हमारे इस्तेमाल के शब्द, सीधी भाषा में
पहले छोटा जवाब, फिर लंबी कहानी हो तो उसका लिंक। DPDP क़ानून वाली प्रविष्टियाँ बताती हैं कि हम उसे अब तक कैसे पढ़ते हैं, वे क़ानूनी सलाह नहीं हैं। जहाँ लिखा हो कि हमने कुछ तय नहीं किया है, वहाँ सच में तय नहीं किया है।
A2A (एजेंट-टू-एजेंट)
A2A, यानी Agent2Agent, एक खुला प्रोटोकॉल है जिससे अलग-अलग टीमों के बनाए एजेंट आपस में बात कर सकते हैं। एक एजेंट दूसरे से कोई काम करवाता है और जवाब पा लेता है। इसे Google ने 2025 में पेश किया था। यह बताता है कि एजेंट बात कैसे करें। सामने वाला एजेंट वही है जो वह कह रहा है, यह जाँचना अलग सवाल है।
जवाबदेह मालिक (accountable owner)
वह व्यक्ति या कंपनी जो एजेंट के किए का जवाब देती है। मान लीजिए कोई एजेंट GST रिटर्न में ग़लत आँकड़ा भर दे, तो कर विभाग जिससे पूछेगा, वही जवाबदेह मालिक है। ज़रूरी नहीं कि वह सॉफ़्टवेयर बनाने वाली कंपनी हो। जिसने एजेंट को भेजा, ज़िम्मेदारी उसकी है। हमारे हर प्रस्तावित क्रेडेंशियल में एक जवाबदेह मालिक का नाम होगा।
एजेंट (agent)
इस साइट पर एजेंट का मतलब वह सॉफ़्टवेयर है जो किसी की तरफ़ से काम करता है, और उसे हर क़दम बताना नहीं पड़ता। वह स्लॉट बुक करता है, फ़ॉर्म भरता है, लोन की अर्ज़ी डालता है। हमारी समझ से भारतीय क़ानून में एजेंट एक औज़ार है, व्यक्ति नहीं, इसलिए उसके किए का जवाब किसी इंसान या कंपनी को देना होता है। एजेंट अक्सर दूसरे औज़ारों को, और कभी-कभी दूसरे एजेंटों को भी बुलाते हैं।
एजेंट कार्ड (agent card)
एजेंट अपने बारे में जो छोटा-सा परिचय छापता है, A2A प्रोटोकॉल के तरीक़े से: नाम, वह क्या कर सकता है, उस तक कैसे पहुँचें और कैसे पहचान कराएँ। दुकान के बोर्ड की तरह समझ लीजिए, जिस पर पता लिखा हो। इससे पता चलता है कि एजेंट अपने बारे में क्या कहता है। यह इसका सबूत नहीं देता, और यह भी नहीं बताता कि एजेंट के पीछे कौन खड़ा है।
एजेंट की पहचान (agent identity)
किसी सॉफ़्टवेयर एजेंट के बारे में तीन सवालों के जवाब। यह कौन-सा एजेंट है? इसे किसने भेजा? और क्या यह बात आज भी सच है? सिर्फ़ नाम काफ़ी नहीं होता, क्योंकि नाम तो कोई भी लिख सकता है। अस्पताल को तय करना हो कि कोई एजेंट ऑपरेशन की तारीख़ बदल सकता है या नहीं, तो अनुरोध आगे बढ़ने से पहले उसे तीनों बातें जाँचनी होंगी।
AgentFact (एजेंटफ़ैक्ट)
AgentFacts वह नाम है जो NANDA प्रोजेक्ट किसी एजेंट के अपने छापे हुए परिचय के लिए इस्तेमाल करता है, कि वह क्या कर सकता है। हम इसका ज़िक्र इसलिए करते हैं कि लोग पूछते हैं हमारा इससे क्या रिश्ता है। हमारी समझ से यह उसी इलाक़े में चल रही एक साथी कोशिश है, मुक़ाबले वाली नहीं। दोनों की बारीक तुलना हमने अभी नहीं की है।
सत्यापन-पत्र (attestation)
ऐसे व्यक्ति या संस्था का हस्ताक्षर किया हुआ बयान जो सच जानने की स्थिति में है। बैंक का यह कहना कि यह एजेंट हमारा है, एक attestation है। नियामक का यह कहना कि यह कंपनी लाइसेंस-शुदा है, वह भी। उसकी क़ीमत उतनी ही है जितना बयान देने वाले पर जाँचने वाले का भरोसा। वह ग़लत भी हो सकता है, इसीलिए उसकी एक्सपायरी तारीख़ होनी चाहिए और उसे वापस लेने का तरीक़ा भी।
ऑडिट ट्रेल (audit trail)
जो हुआ उसका रिकॉर्ड: किस एजेंट ने क्या किया, कब किया और किसके कहने पर। कोई ग़लत फ़ाइलिंग या ग़लत भुगतान हो जाए तो यही रिकॉर्ड बहस की जगह क्रम समझने में काम आता है। अगर रिकॉर्ड सिर्फ़ उसी कंपनी के पास है जिससे सवाल पूछे जा रहे हैं, तो कमज़ोरी साफ़ है। इसलिए हमें इसकी फ़िक्र है कि एक प्रति किसके पास रहती है।
सहमति प्रबंधक (consent manager)
भारत के DPDP क़ानून के तहत एक पंजीकृत संस्था, जिसके ज़रिए कोई व्यक्ति अपने निजी डेटा को साझा करने की सहमति एक ही जगह से दे सकता है, देख सकता है और वापस ले सकता है। हर सेवा पर अलग फ़ॉर्म भरने की जगह एक खिड़की समझ लीजिए। जब कोई AI एजेंट आपकी तरफ़ से काम करे तो सहमति प्रबंधक कहाँ बैठता है, यह हम अभी समझ रहे हैं। यह क़ानूनी सलाह नहीं है।
क्रेडेंशियल (credential)
एजेंट जो हस्ताक्षरित बयान अपने साथ रखता है और जिसमें जाँचने लायक़ बातें होती हैं: वह किसके लिए काम करता है, क्या कर सकता है, कब तक। रोज़मर्रा की मिसाल ड्राइविंग लाइसेंस है। जाँचने वाले को हर बार जारी करने वाले को फ़ोन नहीं करना पड़ता, पर उसे यह पता चलना चाहिए कि लाइसेंस असली है और रद्द नहीं हुआ।
डेटा फ़िड्यूशियरी (data fiduciary)
DPDP क़ानून का शब्द: वह जो अकेले या दूसरों के साथ तय करता है कि निजी डेटा किसलिए और कैसे इस्तेमाल होगा। मान लीजिए आपने एजेंट से डॉक्टर की अपॉइंटमेंट बुक करवाई और उसने आपकी सेहत की जानकारी सँभाली। फ़िड्यूशियरी एजेंट बनाने वाली कंपनी हो सकती है, उसे चलाने वाली कंपनी, या क्लिनिक। इस पर हम क़ानून पढ़ रहे हैं। यह क़ानूनी सलाह नहीं है।
डेटा प्रिंसिपल (data principal)
DPDP क़ानून में उस व्यक्ति को यह कहा गया है जिसके बारे में निजी डेटा है। कोई एजेंट आपके बैंक स्टेटमेंट सँभालता है तो आप डेटा प्रिंसिपल हैं। क़ानून डेटा प्रिंसिपल को कुछ हक़ देता है, जैसे यह पूछना कि उनके बारे में क्या रखा गया है, और ग़लती सुधरवाना। बच्चे की तरफ़ से माता-पिता या क़ानूनी अभिभावक काम करते हैं। यह क़ानूनी सलाह नहीं है।
प्रत्यायोजन (delegation)
कोई काम किसी और को सौंपना, इस इजाज़त के साथ कि वह सीमित दायरे में आपकी तरफ़ से काम करे। आपने एजेंट को बीमा रिन्यू करने दिया, तो आपने काम सौंपा। ठीक से हो तो एजेंट के पास इसका सबूत रहता है कि आपने ठीक क्या सौंपा था, उससे ज़्यादा कुछ नहीं। ग़लत तरीक़े से हो तो वह एक साझा पासवर्ड बन जाता है, और सामने वाला समझ नहीं पाता कि आपका मतलब क्या था।
प्रत्यायोजन की कड़ी (delegation chain)
जब सौंपा गया काम आगे फिर किसी को सौंप दिया जाए। आप अपने असिस्टेंट एजेंट से यात्रा का इंतज़ाम करने को कहते हैं, वह बुकिंग एजेंट से कहता है, और वह भुगतान एजेंट से। इस कड़ी में दर्ज रहता है कि किसने कौन-सी इजाज़त किसे दी। हमारा मानना है कि हर अगली कड़ी के पास उतना ही अधिकार हो जितना पिछली के पास था, या उससे कम। कभी ज़्यादा नहीं।
DID (विकेंद्रित पहचानकर्ता)
DID, यानी decentralised identifier, एक तरह की पहचान है जिसे W3C के मानक ने परिभाषित किया है। उसे बनने या खोजे जाने के लिए किसी एक कंपनी की डायरेक्टरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे किसी एजेंट या संगठन को ऐसा नाम मिलता है जिसे कोई भी एक प्रकाशित तरीक़े से जाँच सके। हमारे काम में DID कहाँ बैठते हैं, यह हमने अभी तय नहीं किया है, और तय होने का दिखावा भी नहीं करेंगे।
DPDP क़ानून
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, यानी निजी डेटा सँभालने पर भारत का क़ानून। इसमें शामिल लोगों के नाम तय हैं, डेटा प्रिंसिपल और डेटा फ़िड्यूशियरी। सहमति सरल भाषा में माँगनी होती है, और ज़िम्मेदारियाँ और जुर्माने तय हैं। हमारी जानकारी में इसमें AI एजेंटों का नाम नहीं है। आपकी तरफ़ से काम करने वाले एजेंट पर यह कैसे लागू होगा, यह खुला सवाल है। यह क़ानूनी सलाह नहीं है।
बाद में टिकने वाला सबूत
ऐसा रिकॉर्ड जिस पर नियामक, अदालत या ऑडिटर भरोसा कर सके। सिर्फ़ यह लिखा होना काफ़ी नहीं कि कुछ हुआ था। उसमें दिखे कि क्या जाँचा गया, कब, और जवाब क्या आया, और उसे जाँचने वाले पक्ष ने ख़ुद रखा हो। अस्पताल ने मंगलवार को किसी एजेंट को अंदर आने दिया, तो शुक्रवार को वह दिखा सके कि क्यों।
जाँच न हो पाए तो मना (fail closed)
जब जाँच पूरी न हो सके, तो जवाब ना है। रजिस्ट्री तक पहुँचा न जाए या क्रेडेंशियल पढ़ा न जाए, तो अनुरोध रुकता है या ठुकरा दिया जाता है। उल्टा तरीक़ा, यानी fail open, जाँच टूटने पर सब कुछ अंदर जाने देता है। वह आराम का है, जब तक वह एक दिन न आ जाए जब मायने रखता है। बैंक और अस्पताल आम तौर पर पहला तरीक़ा चाहते हैं।
आपसी तालमेल (interoperability)
अलग-अलग सिस्टम का बिना हर जोड़ी के लिए ख़ास समझौते के साथ काम करना। पुणे का अस्पताल उस एजेंट को जाँच सके जिसे मुंबई के बैंक ने दर्ज किया था, और वह भी उसी तरीक़े से। UPI इसीलिए अलग-अलग ऐप और बैंकों में चलता है। यह न हो तो हर कंपनी की डायरेक्टरी एक बंद अहाता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए साझा मानक चाहिए, और उन्हें अपनाने वाले लोग।
जारीकर्ता (issuer)
जो क्रेडेंशियल पर दस्तख़त करता है। यह कोई कंपनी हो सकती है जो अपने ही एजेंट की ज़मानत ले रही है, कोई उद्योग संस्था जो कह रही है कि फ़र्म लाइसेंस-शुदा है, या कोई दफ़्तर जो इजाज़त दे रहा है। जाँचने वाला तय करता है कि वह किन जारीकर्ताओं पर, किस बात के लिए भरोसा करेगा। जिस जारीकर्ता को कोई जानता ही नहीं, उसका क्रेडेंशियल दस्तख़त किया हुआ एक काग़ज़ भर है।
MCP (मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल)
Model Context Protocol, एक खुला प्रोटोकॉल जिसे Anthropic ने 2024 के आख़िर में पहली बार छापा। इससे कोई AI ऐप्लिकेशन औज़ारों और डेटा स्रोतों से एक तय तरीक़े से जुड़ सकता है। मोटे तौर पर यह तय करता है कि एजेंट किसी औज़ार तक पहुँचे कैसे। यह एजेंटों की पहचान का रजिस्टर नहीं है। हमारे काम से इसकी पूरी तुलना हमने अभी नहीं की है।
कब्ज़े का सबूत (proof of possession)
यह दिखाना कि क्रेडेंशियल पेश करने वाला एजेंट वही है जिसे वह दिया गया था, कोई ऐसा नहीं जिसने उसकी नक़ल कर ली हो। साधारण API टोकन जैसी बेयरर चाबी उसी के काम आती है जिसके हाथ में हो। कब्ज़े का सबूत एक ऐसी चीज़ जोड़ता है जो असली धारक कर सकता है और नक़ल लेकर बैठा चोर नहीं कर सकता। चुराया हुआ क्रेडेंशियल अकेले किसी काम का नहीं रहता।
रजिस्ट्री (registry)
ऐसी सार्वजनिक सूची जिसमें आप कुछ भी खोज सकें। हम बार-बार गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की मिसाल देते हैं: एक नंबर से ऐसी एंट्री खुलती है जिसमें लिखा है कि गाड़ी किसकी है और काग़ज़ात चालू हैं या नहीं। एजेंट के लिए एंट्री में यह होगा कि उसे कौन चलाता है, उसके पीछे कौन खड़ा है और वह अभी चालू है या नहीं।
भरोसा करने वाला पक्ष (relying party)
जो किसी क्रेडेंशियल के भरोसे कोई फ़ैसला लेता है। अस्पताल, जो तय कर रहा है कि कोई एजेंट ऑपरेशन की तारीख़ बदल सकता है या नहीं, एक relying party है। टैक्स पोर्टल भी, और लोन डेस्क भी। यह वही पक्ष है जो दूसरे सिरे पर बैठकर जाँचता है, और जाँच छूट गई तो सवाल भी सबसे पहले इसी से पूछे जाएँगे।
रद्द करना (revocation)
क्रेडेंशियल की मियाद ख़त्म होने से पहले उसे वापस ले लेना। किसी कंपनी को कोई गड़बड़ी दिखती है, या एजेंट की निगरानी करने वाला इंसान नौकरी छोड़ देता है, और वह चाहती है कि इजाज़त आज ही बंद हो। स्विच दबाना मुश्किल नहीं है। मुश्किल यह है कि जो भी दफ़्तर उस क्रेडेंशियल को जाँचता है, उसे जल्दी दिख जाए कि वह बंद हो चुका है। जो इजाज़त सिर्फ़ काग़ज़ पर वापस ली जा सके, वह जोखिम है।
रॉयल्टी-मुक्त लाइसेंस (royalty-free licence)
किसी चीज़ को इस्तेमाल करने की इजाज़त, यहाँ मानक के पीछे की तकनीक, हर बार हमें पैसे दिए बिना। मानक रॉयल्टी-मुक्त हो तो कोई भी कंपनी उसे बिना फ़ीस के अपने प्रोडक्ट में लगा सकती है। हमारा इरादा यही है। लाइसेंस का मसौदा बन चुका है, दस्तख़त नहीं हुए, और जब तक नहीं होंगे हम यह नहीं कहेंगे कि वह लागू है।
दायरा (scope)
क्रेडेंशियल जितनी इजाज़त देता है उसकी हद। खाता पढ़ सकते हैं, बदल नहीं सकते। मसौदा बना सकते हैं, जमा नहीं कर सकते। एक तय रक़म तक ख़र्च कर सकते हैं। दायरा बहुत चौड़ा हो तो आम तौर पर एजेंट वही सब कर बैठते हैं जो किसी का इरादा नहीं था। तंग दायरे उबाऊ होते हैं, पर अच्छे होते हैं। बस उन्हें कोई लागू करने वाला चाहिए, सिर्फ़ लेबल पर भरोसा नहीं चलता।
धारा 8 कंपनी (Section 8 company)
भारत के कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत कंपनी, जो परोपकारी या जनहित के उद्देश्यों के लिए बनती है। मुनाफ़ा उन्हीं उद्देश्यों में लगता है, और सदस्यों को लाभांश नहीं बँटता। हम साक्ष्य को ऐसी ही कंपनी के रूप में खड़ा करने की तैयारी में हैं, इसीलिए हम "गठन प्रक्रिया में" कहते हैं। अभी इसका निगमन नहीं हुआ है, और किसी से कोई फ़ीस नहीं माँगी जा रही।
काम-विशेष (task-scoped)
इजाज़त किसी एक काम तक सीमित, खुली छूट की जगह। जो क्रेडेंशियल एजेंट को सिर्फ़ इसी कारोबार का इसी महीने का GST रिटर्न भरने दे, और कुछ नहीं, वह task-scoped है। काम पूरा होते ही इजाज़त भी ख़त्म। एजेंट को कोई बहका दे या वह ग़लत चल पड़े, तो नुक़सान उसी डिब्बे के अंदर रहता है जो उसे दिया गया था।
सत्यापन-योग्य क्रेडेंशियल (verifiable credential)
W3C के मानक के प्रारूप वाला क्रेडेंशियल, जिसे इस तरह बनाया गया है कि कोई भी बिना हर बार जारीकर्ता से पूछे यह जाँच सके कि उसे किसने जारी किया और उसमें छेड़छाड़ तो नहीं हुई। यह एक आम प्रारूप है, डिग्री और लाइसेंस इसकी जानी-पहचानी मिसालें हैं। हम देख रहे हैं कि यही विचार एजेंटों पर कैसे लग सकता है। हमने अपना कोई प्रारूप अभी प्रकाशित नहीं किया है।
जाँच (verification)
एजेंट को अंदर आने देने से पहले भरोसा करने वाला पक्ष जो जाँच करता है। क्या यह क्रेडेंशियल असली है, क्या अभी चालू है, क्या जो माँगा जा रहा है उसे कवर करता है, और क्या इसे पेश करने वाला एजेंट वही है जिसे यह दिया गया था? यह हर बार होती है, सिर्फ़ साइन-अप के वक़्त एक बार नहीं, क्योंकि सोमवार और शुक्रवार के बीच जवाब बदल सकते हैं।
साक्ष्य (witness)
हमारे नाम का मतलब। साक्ष्य यानी सबूत, या उस इंसान की गवाही जिसने देखा कि क्या हुआ और जिससे बाद में पूछा जा सकता है। हम चाहते हैं कि एजेंट की हर कार्रवाई का इस अर्थ में एक साक्षी हो: ऐसा रिकॉर्ड जो एजेंट के अपने कहे पर टिका न हो। हर एजेंट को एक साक्षी चाहिए, यही हमारी पंक्ति है।