हम इसे कैसे चलाना चाहते हैं
12 अक्टूबर 2026 को बदला गया
अभी की स्थिति
साक्ष्य का निगमन नहीं हुआ है। इस पन्ने की हर बात योजना है, ताकि पक्की होने से पहले आप उस पर बहस कर सकें। जो योजना है उसे हम योजना कहते हैं, और जो तय नहीं है वह भी बताते हैं।
इस चित्र को लिखे हुए रूप में पढ़ें
- सबसे ऊपर साक्ष्य भारत फ़ाउंडेशन है, जो सेक्शन 8 की गैर-लाभकारी कंपनी होगी। यह अभी योजना में है, निगमित नहीं हुई है।
- उसके नीचे तीन हिस्से योजना में हैं: सदस्य, कार्य-समूह और बोर्ड के स्थान।
- सदस्य वे संगठन और व्यक्ति हैं जो जुड़ेंगे। यह अभी योजना में है।
- कार्य-समूहों में सदस्य मिलकर मानक लिखेंगे। यह अभी योजना में है।
- बोर्ड में सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों के लिए स्थान रखने की योजना है।
क़ानूनी रूप
हम साक्ष्य भारत फ़ाउंडेशन को भारत के कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत कंपनी के रूप में खड़ा कर रहे हैं। वह गठन प्रक्रिया में है। धारा 8 की कंपनी किसी सार्वजनिक या परोपकारी उद्देश्य के लिए होती है। वह सदस्यों को लाभांश नहीं दे सकती, और जो बचता है वह काम में वापस जाता है।
बोर्ड में कौन बैठेगा
चार तरह की सीटों की योजना है: सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, और सदस्यों द्वारा चुने गए लोग। हमने किसी का नाम नहीं रखा है, क्योंकि नाम रखने को कोई है ही नहीं। कोई सीट पक्की नहीं है। हर समूह को कितनी सीटें मिलेंगी, यह भी तय नहीं है, और हम चाहेंगे कि इसे तय करने में संस्थापक समूह हाथ बँटाए।
कार्य-समूह
चार की योजना है। वे अभी मौजूद नहीं हैं।
- क्रेडेंशियल का प्रारूप। एजेंट के क्रेडेंशियल में क्या लिखा होता है और वह कैसे दर्ज होता है।
- भरोसा करने वाले पक्ष के लिए मार्गदर्शन। बैंक, अस्पताल या दफ़्तर के लिए सीधी सलाह कि क्या जाँचें और जाँच फ़ेल हो जाए तो क्या करें।
- DPDP से तालमेल। प्रारूप और मार्गदर्शन भारत के डेटा संरक्षण क़ानून से कैसे मेल खाते हैं। इस समूह में वकीलों की ज़रूरत पड़ेगी।
- हिंदी शब्द। इन सब चीज़ों के लिए ऐसे शब्द जो लोग सच में बोलते हैं, हिंदी में और दूसरी भारतीय भाषाओं में।
लाइसेंस
रेफ़रेंस इम्प्लीमेंटेशन के पीछे के कुछ तकनीकी काम पर पेटेंट फ़ाइलिंग है। हमारा इरादा है कि कोई भी खुले स्पेसिफ़िकेशन को बिना हमें पैसे दिए या हमसे पूछे लागू कर सके। ऐसा कहने वाले लाइसेंस का मसौदा बन चुका है। उस पर दस्तख़त नहीं हुए, और जब तक नहीं होते हम उसे पूरा नहीं कहेंगे।
ख़र्च कैसे चलेगा
शुरुआत में फ़ाउंडेशन अनुदान और दान पर चलेगा। फ़ीस होगी या नहीं, यह फ़ाउंडेशन बनने के बाद संस्थापक समूह के साथ तय होगा, और तब तक किसी से कुछ नहीं माँगा जाएगा।
काम किस क्रम में होगा
यह हमारी अभी की सोच है, और बदल सकती है।
- फ़ाउंडेशन का निगमन।
- पहले संस्थापक सदस्यों को मंज़ूरी।
- उनके साथ एक चार्टर तय करना: फ़ैसले कैसे होंगे, फ़ीस कैसे तय होगी, स्पेसिफ़िकेशन कैसे बदल सकेगा।
- पहला बोर्ड बैठाना।
- स्पेसिफ़िकेशन छापना और लाइसेंस पर दस्तख़त करना।
तब तक
बोर्ड नहीं है, इसलिए फ़ैसले संस्थापक लेते हैं। उन्होंने अपने ऊपर एक सीधा नियम रखा है: फ़ैसला खुले में लें, और लिखकर रखें कि क्यों। जब लिखने लायक़ फ़ैसले होंगे, तो हम इस साइट पर बता देंगे कि वे कहाँ मिलेंगे।